जथा सुअंजन अंजि दृग साधक सिद्ध
जथा सुअंजन अंजि दृग साधक सिद्ध
दोहा १ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
जथा सुअंजन अंजि दृग साधक सिद्ध सुजान। कौतुक देखत सैल बन भूतल भूरि निधान॥ १ ॥
अर्थ
जैसे सिद्धाञ्जनको नेत्रोंमें लगाकर साधक, सिद्ध और सुजान पर्वतों, वनों और पृथ्वीके अंदर कौतुकसे ही बहुत-सी खानें देखते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “गुरु वन्दना” प्रकरण का दोहा १ है। इस प्रकरण में गुरु-चरण-वन्दना और उनकी कृपा से अज्ञान-नाश तथा रामकथा-बोध का वर्णन है।
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गुरु वन्दना