जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी

चौपाई १, दोहा ३२६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी। सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी॥ कहि न जाइ कछु दाइज भूरी। रहा कनक मनि मंडपु पूरी॥ १ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी के विवाह की जैसी विधि वर्णन की गयी, उसी रीति से सब राजकुमार विवाहे गये। दहेज की अधिकता कुछ कही नहीं जाती; सारा मंडप सोने और मणियों से भर गया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह