जानि प्रिया आदरु अति कीन्हा

चौपाई २, दोहा १०७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जानि प्रिया आदरु अति कीन्हा। बाम भाग आसनु हर दीन्हा॥ बैठीं सिव समीप हरषाई। पूरुब जन्म कथा चित आई॥ २ ॥

अर्थ

अपनी प्यारी पत्नी जानकर शिवजी ने उनका बहुत आदर-सत्कार किया और अपनी बायीं ओर बैठने के लिये आसन दिया। पार्वतीजी प्रसन्न होकर शिवजी के पास बैठ गयीं। उन्हें पिछले जन्म की कथा स्मरण हो आयी।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।

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शिवजी का विवाह