जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित
जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित
दोहा २८४ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित गात। जोरि पानि बोले बचन हृदयँ न प्रेमु अमात॥ २८४ ॥
अर्थ
तब उन्होंने श्रीरामजी का प्रभाव जाना, [जिसके कारण] उनका शरीर पुलकित और प्रफुल्लित हो गया। वे हाथ जोड़कर वचन बोले--प्रेम उनके हृदय में समाता न था--।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का दोहा २८४ है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद