जाकी सहज स्वास श्रुति चारी
जाकी सहज स्वास श्रुति चारी
चौपाई ३, दोहा २०४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जाकी सहज स्वास श्रुति चारी। सो हरि पढ़ यह कौतुक भारी॥ बिद्या बिनय निपुन गुन सीला। खेलहिं खेल सकल नृप लीला॥ ३ ॥
अर्थ
चारों वेद जिनके स्वाभाविक स्वास हैं, वे भगवान् पढ़ें, यह बड़ा कौतुक (अचरज) है। चारों भाई विद्या, विनय, गुण और शील में [बड़े] निपुण हैं और सब राजाओं की लीलाओं के ही खेल खेलते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २०४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला