जगु बिरंचि उपजावा जब तें

चौपाई ३, दोहा ३२० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जगु बिरंचि उपजावा जब तें। देखे सुने ब्याह बहु तब तें॥ सकल भाँति सम साजु समाजू। सम समधी देखे हम आजू॥ ३ ॥

अर्थ

जब से ब्रह्माजी ने जगत् को उत्पन्न किया, तब से हमने बहुत विवाह देखे-सुने; परन्तु सब प्रकार से समान साज-समाज और बराबरी के (पूर्ण समतायुक्त) समधी तो आज ही देखे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत