गै निसि बहुत सयन अब कीजे

चौपाई ४, दोहा १६९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

गै निसि बहुत सयन अब कीजे। मोहि तोहि भूप भेंट दिन तीजे॥ मैं तपबल तोहि तुरग समेता। पहुँचैहउँ सोवतहि निकेता॥ ४ ॥

अर्थ

हे राजन्‌! रात बहुत बीत गयी, अब सो जाओ। आज से तीसरे दिन मुझसे तुम्हारी भेंट होगी। तप के बल से मैं घोड़े सहित तुमको सोते ही घर पहुँचा दूँगा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १६९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा