एक बार त्रेता जुग माहीं
एक बार त्रेता जुग माहीं
चौपाई १, दोहा ४८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
एक बार त्रेता जुग माहीं। संभु गए कुंभज रिषि पाहीं॥ संग सती जगजननि भवानी। पूजे रिषि अखिलेस्वर जानी॥ १ ॥
अर्थ
एक बार त्रेतायुग में शिवजी अगस्त्य ऋषि के पास गये। उनके साथ जगज्जननी भवानी सतीजी भी थीं। ऋषि ने सम्पूर्ण जगत् के ईश्वर जानकर उनका पूजन किया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज और याज्ञवल्क्य के संवाद तथा रामकथा की भूमिका का वर्णन है।
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याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य