एहि बिधि गयउ कालु बहु बीती

चौपाई २, दोहा ७६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

एहि बिधि गयउ कालु बहु बीती। नित नै होइ राम पद प्रीती॥ नेमु प्रेमु संकर कर देखा। अबिचल हृदयँ भगति कै रेखा॥ २ ॥

अर्थ

इस प्रकार बहुत समय बीत गया। श्रीरामचन्द्रजी के चरणों में नित नयी प्रीति हो रही है। शिवजी के [कठोर] नियम, [अनन्य] प्रेम और उनके हृदय में भक्तिकी अटल टेक को [जब श्रीरामचन्द्रजी ने] देखा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या