दीन्हि असीस बिप्र बहु भाँती
दीन्हि असीस बिप्र बहु भाँती
चौपाई ५, दोहा ३६० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
दीन्हि असीस बिप्र बहु भाँती। चले न प्रीति रीति कहि जाती॥ रामु सप्रेम संग सब भाई। आयसु पाइ फिरे पहुँचाई॥ ५ ॥
अर्थ
ब्राह्मण विश्वामित्रजी ने बहुत प्रकार से आशीर्वाद दिये और वे चल पड़े, प्रीति की रीति कही नहीं जाती। सब भाइयों को साथ लेकर श्रीरामजी प्रेम के साथ उन्हें पहुँचाकर और आज्ञा पाकर लौटे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना