देवहूति पुनि तासु कुमारी

चौपाई ३, दोहा १४२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

देवहूति पुनि तासु कुमारी। जो मुनि कर्दम कै प्रिय नारी॥ आदिदेव प्रभु दीनदयाला। जठर धरेउ जेहिं कपिल कृपाला॥ ३ ॥

अर्थ

पुनः देवहूति उनकी कन्या थी, जो कर्दम मुनि की प्यारी पत्नी हुई और जिन्होंने आदिदेव, दीनों पर दया करनेवाले समर्थ एवं कृपालु भगवान् कपिल को गर्भ में धारण किया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।

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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान