चौकें भाँति अनेक पुराईं
चौकें भाँति अनेक पुराईं
चौपाई ४, दोहा २८८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
चौकें भाँति अनेक पुराईं। सिंधुर मनिमय सहज सुहाईं॥ ४ ॥
अर्थ
गजमुक्ताओं के सहज ही सुहावने अनेकों तरह के चौक पुराये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २८८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान