बोली अपर कहेहु सखि नीका

चौपाई १, दोहा २२३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बोली अपर कहेहु सखि नीका। एहिं बिआह अति हित सबही का॥ कोउ कह संकर चाप कठोरा। ए स्यामल मृदु गात किसोरा॥ १ ॥

अर्थ

दूसरी ने कहा—हे सखी! तुमने बहुत अच्छा कहा। इस विवाह से सभी का परम हित है। किसी ने कहा—शंकरजी का धनुष कठोर है और ये साँवले राजकुमार कोमल शरीर के बालक हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २२३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण