बोले रामहि देइ निहोरा

चौपाई ४, दोहा २७८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बोले रामहि देइ निहोरा। बचउँ बिचारि बंधु लघु तोरा॥ मनु मलीन तनु सुंदर कैसें। बिष रस भरा कनक घटु जैसें॥ ४ ॥

अर्थ

तब श्रीरामचन्द्रजी पर एहसान जनाकर परशुरामजी बोले--तेरा छोटा भाई समझकर मैं इसे बचा रहा हूँ। यह मन का मैला और शरीर का कैसा सुन्दर है, जैसे विष के रस से भरा हुआ सोने का घड़ा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २७८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।

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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद