बिषय करन सुर जीव समेता
बिषय करन सुर जीव समेता
चौपाई ३, दोहा ११७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बिषय करन सुर जीव समेता। सकल एक तें एक सचेता॥ सब कर परम प्रकासक जोई। राम अनादि अवधपति सोई॥ ३ ॥
अर्थ
विषय, इन्द्रियाँ, इन्द्रियों के देवता और जीवात्मा--ये सब एक की सहायतासे एक चेतन होते हैं। (अर्थात् विषयों का प्रकाश इन्द्रियों से, इन्द्रियों का इन्द्रियों के देवताओं से और इन्द्रियदेवताओं का चेतन जीवात्मा से प्रकाश होता है।) इन सब का जो परम प्रकाशक है (अर्थात् जिससे इन सब का प्रकाश होता है), वही अनादि ब्रह्म अयोध्यानरेश श्रीरामचन्द्रजी हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद