बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना
बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना
चौपाई ३, दोहा ११८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना। कर बिनु करम करइ बिधि नाना॥ आनन रहित सकल रस भोगी। बिनु बानी बकता बड़ जोगी॥ ३ ॥
अर्थ
वह (ब्रह्म) बिना ही पैर के चलता है, बिना ही कान के सुनता है, बिना ही हाथ के नाना प्रकार के काम करता है, बिना मुँह (जिह्वा) के ही सारे (छहों) रसों का आनन्द लेता है और बिना ही वाणी के बहुत योग्य वक्ता है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद