बिहसि लखनु बोले मृदु बानी
बिहसि लखनु बोले मृदु बानी
चौपाई १, दोहा २७३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महा भटमानी॥ पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥ १ ॥
अर्थ
लक्ष्मणजी हँसकर कोमल वाणी से बोले--अहो, मुनीश्वर तो अपने को बड़ा भारी योद्धा समझते हैं। बार-बार मुझे कुल्हाड़ी दिखाते हैं। फूँक से पहाड़ उड़ाना चाहते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २७३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद