बिदुषन्ह प्रभु बिराटमय दीसा
बिदुषन्ह प्रभु बिराटमय दीसा
चौपाई १, दोहा २४२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बिदुषन्ह प्रभु बिराटमय दीसा। बहु मुख कर पग लोचन सीसा॥ जनक जाति अवलोकहिं कैसें। सजन सगे प्रिय लागहिं जैसें॥ १ ॥
अर्थ
विद्वानों को प्रभु विराट् रूप में दिखायी दिये, जिसके बहुत-से मुँह, हाथ, पैर, नेत्र और सिर हैं। जनक जाति वाले प्रभु को किस तरह प्रिय रूप में देखते हैं, जैसे सगे सजन प्रिय लगते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।
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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश