बिधि निषेधमय कलिमल हरनी
बिधि निषेधमय कलिमल हरनी
चौपाई ५, दोहा २ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बिधि निषेधमय कलिमल हरनी। करम कथा रबिनंदनि बरनी॥ हरि हर कथा बिराजति बेनी। सुनत सकल मुद मंगल देनी॥ ५ ॥
अर्थ
विधि और निषेध (यह करो और यह न करो) रूपी कर्मोंकी कथा कलियुगके पापोंको हरनेवाली सूर्यतनया यमुनाजी हैं और भगवान् विष्णु और शंकरजीकी कथाएँ त्रिवेणीरूपसे सुशोभित हैं, जो सुनते ही सब आनन्द और कल्याणोंकी देनेवाली हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “गुरु वन्दना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु-चरण-वन्दना और उनकी कृपा से अज्ञान-नाश तथा रामकथा-बोध का वर्णन है।
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गुरु वन्दना