भोजन करत चपल चित इत उत

दोहा २०३ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

भोजन करत चपल चित इत उत अवसरु पाइ। भाजि चले किलकत मुख दधि ओदन लपटाइ॥ २०३ ॥

अर्थ

भोजन करते हैं पर चित्त चञ्चल है। अवसर पाकर मुँह में दही-भात लपेटे किलकारी मारते हुए इधर-उधर भाग चले।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का दोहा २०३ है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।

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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला