भयउ कोलाहल हय गय गाजे

चौपाई ३, दोहा ३०२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भयउ कोलाहल हय गय गाजे। ब्योम बरात बाजने बाजे॥ सुर नर नारि सुमंगल गाईं। सरस राग बाजहिं सहनाईं॥ ३ ॥

अर्थ

बड़ा शोर मच गया, घोड़े और हाथी गरजने लगे। आकाश में और बारात में [दोनों जगह] बाजे बजने लगे। देवांगनाएँ और मनुष्यों की स्त्रियाँ सुन्दर मंगलगान करने लगीं और रसीले राग से शहनाइयाँ बजने लगीं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३०२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान