भै जगबिदित दच्छ गति सोई

चौपाई २, दोहा ६५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भै जगबिदित दच्छ गति सोई। जसि कछु संभु बिमुख कै होई॥ यह इतिहास सकल जग जानी। ताते मैं संछेप बखानी॥ २ ॥

अर्थ

दक्ष की जगत्प्रसिद्ध वही गति हुई जो शिवद्रोही की हुआ करती है। यह इतिहास सारा संसार जानता है, इसलिये मैंने संक्षेप में वर्णन किया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सती का देहत्याग, दक्ष यज्ञ विध्वंस” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का योगाग्नि में देहत्याग और वीरभद्र द्वारा दक्ष यज्ञ के विध्वंस का वर्णन है।

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सती का देहत्याग, दक्ष यज्ञ विध्वंस