बंधु सखा सँग लेहिं बोलाई
बंधु सखा सँग लेहिं बोलाई
चौपाई १, दोहा २०५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बंधु सखा सँग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई॥ पावन मृग मारहिं जियँ जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी भाइयों और इष्ट-मित्रों को बुलाकर साथ ले लेते हैं और नित्य वन में जाकर शिकार खेलते हैं। मन में पवित्र समझकर मृगों को मारते हैं और प्रतिदिन लाकर राजा (दशरथजी) को दिखलाते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २०५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला