बालकु बोलि बधउँ नहिं तोही
बालकु बोलि बधउँ नहिं तोही
चौपाई ३, दोहा २७२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बालकु बोलि बधउँ नहिं तोही। केवल मुनि जड़ जानहि मोही॥ बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्व बिदित छत्रियकुल द्रोही॥ ३ ॥
अर्थ
मैं तुझे बालक जानकर नहीं मारता हूँ। अरे मूर्ख! क्या तू मुझे निरा मुनि ही जानता है? मैं बाल ब्रह्मचारी और अत्यन्त क्रोधी हूँ। क्षत्रियकुल का शत्रु तो विश्वभर में विख्यात हूँ।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २७२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद