बहुरे लोग रजायसु भयऊ
बहुरे लोग रजायसु भयऊ
चौपाई २, दोहा ३६१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बहुरे लोग रजायसु भयऊ। सुतन्ह समेत नृपति गृहँ गयऊ॥ जहँ तहँ राम ब्याहु सबु गावा। सुजसु पुनीत लोक तिहुँ छावा॥ २ ॥
अर्थ
आज्ञा हुई तब सब लोग [अपने-अपने घरों को] लौटे। राजा दशरथजी भी पुत्रों सहित महल में गये। जहाँ-तहाँ सब श्रीरामचन्द्रजी के विवाह की गाथाएँ गा रहे हैं। श्रीरामचन्द्रजी का पवित्र सुयश तीनों लोकों में छा गया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३६१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना