बड़ अधिकार दच्छ जब पावा
बड़ अधिकार दच्छ जब पावा
चौपाई ४, दोहा ६० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बड़ अधिकार दच्छ जब पावा। अति अभिमानु हृदयँ तब आवा॥ नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं॥ ४ ॥
अर्थ
जब दक्ष ने इतना बड़ा अधिकार पाया तब उनके हृदय में अत्यन्त अभिमान आ गया। जगत् में ऐसा कोई नहीं पैदा हुआ जिसको प्रभुता पाकर मद न हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी द्वारा सती का त्याग” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी द्वारा सती को त्यागने और गहन समाधि में लीन होने का वर्णन है।
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शिवजी द्वारा सती का त्याग