और एक तोहि कहउँ लखाऊ

चौपाई २, दोहा १६९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

और एक तोहि कहउँ लखाऊ। मैं एहि बेष न आउब काऊ॥ तुम्हरे उपरोहित कहुँ राया। हरि आनब मैं करि निज माया॥ २ ॥

अर्थ

मैं एक और पहचान तुमको बताये देता हूँ कि मैं इस रूप में कभी न आऊँगा। हे राजन! मैं अपनी माया से तुम्हारे पुरोहित को हर लाऊँगा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १६९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा