यह बड़ि बात भरत कइ नाहीं
यह बड़ि बात भरत कइ नाहीं
चौपाई २, दोहा २१७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
यह बड़ि बात भरत कइ नाहीं। सुमिरत जिनहि रामु मन माहीं॥ बारक राम कहत जग जेऊ। होत तरन तारन नर तेऊ॥ २ ॥
अर्थ
भरतजी के लिये यह कोई बड़ी बात नहीं है, जिन्हें श्रीरामजी स्वयं अपने मन में स्मरण करते रहते हैं। जगत् में जो भी मनुष्य एक बार “राम” कह लेते हैं, वे भी तरने-तारनेवाले हो जाते हैं !।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २१७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में महर्षि भरद्वाज द्वारा भरत और उनके साथियों का दिव्य तपोबल से अद्भुत सत्कार का वर्णन है।
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भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार