तुम्ह त्रिकाल दरसी मुनिनाथा
तुम्ह त्रिकाल दरसी मुनिनाथा
चौपाई ४, दोहा १२५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
तुम्ह त्रिकाल दरसी मुनिनाथा। बिस्व बदर जिमि तुम्हरें हाथा॥ अस कहि प्रभु सब कथा बखानी। जेहि जेहि भाँति दीन्ह बनु रानी॥ ४ ॥
अर्थ
हे मुनिनाथ! आप त्रिकालदर्शी हैं। सम्पूर्ण विश्व आपके लिये हथेली पर रखे हुए बेर के समान है। प्रभु श्रीरामचन्द्रजी ने ऐसा कहकर फिर जिस-जिस प्रकार से रानी कैकेयी ने वनवास दिया, वह सब कथा विस्तार से सुनायी।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद