तेहि फल कर फलु दरस तुम्हारा

चौपाई ३, दोहा २१० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

तेहि फल कर फलु दरस तुम्हारा। सहित पयाग सुभाग हमारा॥ भरत धन्य तुम्ह जसु जगु जयऊ। कहि अस पेम मगन मुनि भयऊ॥ ३ ॥

अर्थ

[सीता-लक्ष्मणसहित श्रीरामदर्शनरूप] उस महान् फल का परम फल यह तुम्हारा दर्शन है। प्रयागराज समेत हमारा बड़ा भाग्य है। हे भरत! तुम धन्य हो, तुमने अपने यश से जगत् को जीत लिया है। ऐसा कहकर मुनि प्रेम में मग्र हो गये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २१० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का प्रयाग तीर्थ दर्शन और महर्षि भरद्वाज से भक्तिपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद