सुनि मृदु बचन मनोहर पिय के

चौपाई १, दोहा ६४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनि मृदु बचन मनोहर पिय के। लोचन ललित भरे जल सिय के॥ सीतल सिख दाहक भइ कैसें। चकइहि सरद चंद निसि जैसें॥ १ ॥

अर्थ

प्रियतम के कोमल तथा मनोहर वचन सुनकर सीताजी के सुन्दर नेत्र जल से भर गये। श्रीरामजी की यह शीतल सीख उनको कैसी जलानेवाली हुई, जैसे चकवी को शरद् ऋतु की चाँदनी रात होती है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीसीता-राम-संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का वनगमन का दृढ़ निश्चय और श्रीराम से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम-संवाद