सुखु पायउ बिरंचि रचि तेही
सुखु पायउ बिरंचि रचि तेही
चौपाई ४, दोहा १२२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सुखु पायउ बिरंचि रचि तेही। ए जेहि के सब भाँति सनेही॥ राम लखन पथि कथा सुहाई। रही सकल मग कानन छाई॥ ४ ॥
अर्थ
ब्रह्मा ने उसी को रचकर सुख पाया है जिसके ये (श्रीरामचन्द्रजी) सब प्रकार से स्नेही हैं। पथिकरूप श्रीराम-लक्ष्मण की सुन्दर कथा सारे रास्ते और जंगल में छा गयी है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में यमुना-प्रणाम और मार्ग में वनवासियों व ग्रामवासियों के प्रेममय दर्शन का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम