सुबस बसिहि फिरि अवध सुहाई
सुबस बसिहि फिरि अवध सुहाई
चौपाई २, दोहा ३६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सुबस बसिहि फिरि अवध सुहाई। सब गुन धाम राम प्रभुताई॥ करिहहिं भाइ सकल सेवकाई। होइहि तिहुँ पुर राम बड़ाई॥ २ ॥
अर्थ
[तेरी उजाड़ी हुई] यह सुन्दर अयोध्या फिर भलीभाँति बसेगी और समस्त गुणों के धाम श्रीराम की प्रभुता भी होगी। सब भाई उनकी सेवा करेंगे और तीनों लोकों में श्रीराम की बड़ाई होगी।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना