सीस जटा कटि मुनि पट बाँधें
सीस जटा कटि मुनि पट बाँधें
चौपाई ३, दोहा २३९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सीस जटा कटि मुनि पट बाँधें। तून कसें कर सरु धनु काँधें॥ बेदी पर मुनि साधु समाजू। सीय सहित राजत रघुराजू॥ ३ ॥
अर्थ
सिर पर जटा है। कमर में मुनियों का (वल्कल) वस्त्र बाँधे हैं और उसी में तरकस कसे हैं। हाथ में बाण तथा कंधे पर धनुष है। वेदी पर मुनि तथा साधुओं का समुदाय बैठा है और सीताजी सहित श्रीरघुनाथजी विराजमान हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध