ससुर एतादृस अवध निवासू
ससुर एतादृस अवध निवासू
चौपाई ३, दोहा ९८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
ससुर एतादृस अवध निवासू। प्रिय परिवारु मातु सम सासू॥ बिनु रघुपति पद पदुम परागा। मोहि केउ सपनेहुँ सुखद न लागा॥ ३ ॥
अर्थ
ऐसे [ऐश्वर्यशाली] ससुर; [उनकी राजधानी] अयोध्या का निवास; प्रिय कुटुम्बी और माता के समान सासुएँ—ये कोई भी श्रीरघुनाथजी के चरणकमलों की रज के बिना मुझे स्वप्न में भी सुखदायक नहीं लगते।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण-निषाद संवाद, सीता-राम से विदा लेकर सुमंत्र के भारी मन से अयोध्या लौटने का वर्णन है।
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लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी