सनकारे सेवक सकल चले स्वामि रुख

दोहा १९६ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

सनकारे सेवक सकल चले स्वामि रुख पाइ। घर तरु तर सर बाग बन बास बनाएन्हि जाइ॥ १९६ ॥

अर्थ

उसने अपने सब सेवकों को इशारे से कह दिया। वे स्वामी का रुख पाकर चले और उन्होंने घरों में, वृक्षों के नीचे, तालाबों पर तथा बागों और जंगलों में ठहरने के लिये स्थान बना दिये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का दोहा १९६ है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।

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भरत-निषाद मिलन