सकुचि राम निज सपथ देवाई

चौपाई ३, दोहा ९६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सकुचि राम निज सपथ देवाई। लखन सँदेसु कहिअ जनि जाई॥ कह सुमंत्रु पुनि भूप सँदेसू। सहिन सकिहि सिय बिपिन कलेसू॥ ३ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने सकुचाकर, अपनी सौगंध दिलाकर सुमन्त्रजी से कहा कि आप जाकर लक्ष्मण का यह सन्देश न कहियेगा। सुमन्त्र ने फिर राजा का सन्देश कहा कि सीता वन के क्लेश न सह सकेंगी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण-निषाद संवाद, सीता-राम से विदा लेकर सुमंत्र के भारी मन से अयोध्या लौटने का वर्णन है।

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लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी