राम प्रनाम कीन्ह सब काहू

चौपाई ४, दोहा १०८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

राम प्रनाम कीन्ह सब काहू। मुदित भए लहि लोयन लाहू॥ देहिं असीस परम सुखु पाई। फिरे सराहत सुंदरताई॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने सब किसी को प्रणाम किया। नेत्रों का लाभ पाकर सब आनन्दित हो गये और परम सुख पाकर आशीर्वाद देने लगे। श्रीरामजी के सौन्दर्य की सराहना करते हुए वे लौटे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “प्रयाग में भरद्वाज से भेंट” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज मुनि से श्रीराम की भेंट और यमुनातट निवासियों के प्रेम का वर्णन है।

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प्रयाग में भरद्वाज से भेंट