राम लखन सिय रूप निहारी

चौपाई २, दोहा ११४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

राम लखन सिय रूप निहारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी॥ सजल बिलोचन पुलक सरीरा। सब भए मगन देखि दोउ बीरा॥ २ ॥

अर्थ

श्रीराम, लक्ष्मण और सीताजी का रूप देखकर, नेत्रों का [परम] फल पाकर वे सुखी होते हैं। दोनों भाइयों को देखकर सब प्रेमानन्द में मग्र हो गये। उनके नेत्रों में जल भर आया और शरीर पुलकित हो गये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में यमुना-प्रणाम और मार्ग में वनवासियों व ग्रामवासियों के प्रेममय दर्शन का वर्णन है।

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यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम