राम गवनु बन अनरथ मूला

चौपाई ३, दोहा २०७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

राम गवनु बन अनरथ मूला। जो सुनि सकल बिस्व भइ सूला॥ सो भावी बस रानि अयानी। करि कुचालि अंतहुँ पछितानी॥ ३ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी का वनगमन सारे अनर्थों की जड़ है, जिसे सुनकर समस्त संसार को पीड़ा हुई। वह वनगमन भी भावीवश हुआ। बेसमझ रानी ने कुचाल करके अन्त में पछतायी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २०७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का प्रयाग तीर्थ दर्शन और महर्षि भरद्वाज से भक्तिपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद