रघुबर कहेउ लखन भल घाटू

चौपाई १, दोहा १३३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

रघुबर कहेउ लखन भल घाटू। करहु कतहुँ अब ठाहर ठाटू॥ लखन दीख पय उतर करारा। चहुँ दिसि फिरेउ धनुष जिमि नारा॥ १ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा--लक्ष्मण! बड़ा अच्छा घाट है। अब यहीं कहीं ठहरने की व्यवस्था करो। तब लक्ष्मणजी ने पयस्विनी नदी के उत्तर के ऊँचे किनारे को देखा [और कहा कि--] इसके चारों ओर धनुष के जैसा एक नाला फिरा हुआ है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा