पुनि पुनि पूँछत मंत्रिहि राऊ

चौपाई १, दोहा १५० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

पुनि पुनि पूँछत मंत्रिहि राऊ। प्रियतम सुअन सँदेस सुनाऊ॥ करहि सखा सोइ बेगि उपाऊ। रामु लखनु सिय नयन देखाऊ॥ १ ॥

अर्थ

राजा बार-बार मन्त्री से पूछते हैं—मेरे प्रियतम पुत्रों का सन्देशा सुनाओ। हे सखा! तुम तुरंत वही उपाय करो जिससे श्रीराम, लक्ष्मण और सीता को मुझे आँखों से दिखा दो।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।

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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान