प्रिया बंधु गति लखि रघुनंदनु

चौपाई ४, दोहा १४१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रिया बंधु गति लखि रघुनंदनु। धीर कृपाल भगत उर चंदनु॥ लगे कहन कछु कथा पुनीता। सुनि सुखु लहहिं लखनु अरु सीता॥ ४ ॥

अर्थ

तब धीर, कृपालु और भक्तों के हृदयों को शीतल करने के लिये चन्दन-रूप रघुनंदन प्रिय पत्नी और भाई लक्ष्मण की दशा देखकर कुछ पवित्र कथाएँ कहने लगते हैं, जिन्हें सुनकर लक्ष्मणजी और सीताजी सुख प्राप्त करते हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १४१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।

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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा