प्रिया बचन कस कहसि कुभाँती

चौपाई ३, दोहा ३१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रिया बचन कस कहसि कुभाँती। भीर प्रतीति प्रीति करि हाँती॥ मोरें भरतु रामु दुइ आँखी। सत्य कहउँ करि संकरु साखी॥ ३ ॥

अर्थ

हे प्रिये! बुरी तरह के वचन कैसे कह रही हो? विश्वास और प्रेम को छोड़कर ऐसे वचन क्यों कह रही हो। मेरे तो भरत और राम दोनों आँखें हैं; यह मैं शंकरजी की साक्षी देकर सत्य कहता हूँ।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।

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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना