प्रभु पितु बचन मोह बस पेली
प्रभु पितु बचन मोह बस पेली
चौपाई ३, दोहा २९८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रभु पितु बचन मोह बस पेली। आयउँ इहाँ समाजु सकेली॥ जग भल पोच ऊँच अरु नीचू। अमिअ अमरपद माहुरु मीचू॥ ३ ॥
अर्थ
मैं मोहवश प्रभु (आप) के और पिताजी के वचनों का उल्लंघन कर और समाज बटोरकर यहाँ आया हूँ। जगत् में भले-बुरे, ऊँचे और नीचे, अमृत और अमरपद (देवताओं का पद), विष और मृत्यु आदि--।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २९८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीराम-भरत संवाद