प्रभु पद पदुम बंदि दोउ भाई
प्रभु पद पदुम बंदि दोउ भाई
चौपाई ४, दोहा ३१८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रभु पद पदुम बंदि दोउ भाई। चले सीस धरि राम रजाई॥ मुनि तापस बनदेव निहोरी। सब सनमानि बहोरि बहोरी॥ ४ ॥
अर्थ
प्रभु के चरणकमलों की वन्दना करके तथा श्रीरामजी की आज्ञा को सिर पर रखकर भरत-शत्रुघ्न दोनों भाई चले। मुनि, तपस्वी और वनदेवता सब का बार-बार सम्मान करके उनकी विनती की।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम द्वारा पादुका प्रदान, भरत की विदाई” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३१८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरतजी को पादुका प्रदान और भरतजी की भावपूर्ण विदाई का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
राम द्वारा पादुका प्रदान, भरत की विदाई