नृप तनु बेद बिदित अन्हवावा

चौपाई १, दोहा १७० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

नृप तनु बेद बिदित अन्हवावा। परम बिचित्र बिमानु बनावा॥ गहि पद भरत मातु सब राखी। रहीं रानि दरसन अभिलाषी॥ १ ॥

अर्थ

वेदों में बतायी हुई विधि से राजाकी देह को स्नान कराया गया और परम विचित्र विमान बनाया गया। भरतजी ने सब माताओं को चरण पकड़कर रखा (अर्थात् प्रार्थना करके उनको सती होने से रोक लिया)। वे रानियाँ भी [श्रीरामके] दर्शनकी अभिलाषासे रह गयीं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-कौसल्या मिलन, करुण संवाद और गुरु वसिष्ठ के मार्गदर्शन में दशरथ की अंत्येष्टि का वर्णन है।

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भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि