नृप कर सुरपुर गवनु सुनावा
नृप कर सुरपुर गवनु सुनावा
चौपाई २, दोहा २४७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
नृप कर सुरपुर गवनु सुनावा। सुनि रघुनाथ दुसह दुखु पावा॥ मरन हेतु निज नेहु बिचारी। भे अति बिकल धीर धुर धारी॥ २ ॥
अर्थ
राजा के सुरपुर गमन की बात सुनायी। सुनकर रघुनाथजी ने दुःसह दुःख पाया। अपने नेह को मरन का हेतु विचारकर धीरधुरन्धर अत्यन्त व्याकुल हो गये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २४७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध