नीलाम्बुज श्यामल कोमलाङ्गं
नीलाम्बुज श्यामल कोमलाङ्गं
श्लोक ३ · अयोध्याकाण्ड
श्लोक पाठ
नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं सीतासमारोपितवामभागम्। पाणौ महासायकचारुचापं नमामि रामं रघुवंशनाथम्॥ ३ ॥
अर्थ
नीले कमल के समान श्याम और कोमल जिनके अंग हैं, श्रीसीताजी जिनके वाम भाग में विराजमान हैं और जिनके हाथों में [क्रमशः] अमोघ बाण और सुन्दर धनुष है, उन रघुवंश के स्वामी श्रीरामचन्द्रजी को मैं नमस्कार करता हूँ।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “मंगलाचरण” प्रकरण का श्लोक ३ है। इस प्रकरण में अयोध्याकांड के आरंभ में शिव, गुरु और संतों की श्रद्धापूर्ण वंदना का वर्णन है।
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मंगलाचरण