नाथ साथ साँथरी सुहाई
नाथ साथ साँथरी सुहाई
चौपाई ४, दोहा १४० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
नाथ साथ साँथरी सुहाई। मयन सयन सय सम सुखदाई॥ लोकप होहिं बिलोकत जासू। तेहि कि मोहि सक बिषय बिलासू॥ ४ ॥
अर्थ
स्वामी के साथ सुन्दर साथरी (कुश और पत्तों की सेज) सैकड़ों कामदेव की सेजों के समान सुख देनेवाली है। जिनके [कृपापूर्वक] देखनेमात्र से जीव लोकपाल हो जाते हैं, उनको कहीं भोग-विलास मोहित कर सकते हैं!।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।
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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा